पार्श्वनाथ एक्सोटिका परियोजना के घर खरीदारों को दो दशक बाद भी नहीं मिला कब्जा, 17 जुलाई को पेश होने का निर्देश, अनुपालन नहीं होने पर गैर-जमानती वारंट की चेतावनी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (एचआरईआरए) के आदेशों का लगातार पालन नहीं करने पर पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड, पार्श्वनाथ हेस्सा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड तथा उनके निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों के व्यक्तिगत बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने दोनों कंपनियों और उनके निदेशकों के विरुद्ध नए जमानती वारंट भी जारी किए हैं तथा उन्हें 17 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक आदेशों का पालन नहीं किया गया या संबंधित पक्ष उपस्थित नहीं हुए तो गैर-जमानती वारंट सहित और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ पार्श्वनाथ एक्सोटिका आवासीय परियोजना, सेक्टर-53, गुरुग्राम के घर खरीदारों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने लगभग दो दशक पहले फ्लैट की पूरी कीमत चुका दी थी, लेकिन आज तक न तो उन्हें फ्लैट का कब्जा मिला और न ही एचआरईआरए द्वारा निर्धारित मुआवजा।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2006 में आवासीय इकाइयों का आवंटन किया गया था और वर्ष 2007 की शुरुआत में बिल्डर-बायर समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। समझौते के अनुसार 36 माह के भीतर, अर्थात फरवरी 2013 तक, फ्लैट का कब्जा दिया जाना था। खरीदारों ने लगभग 1.78 करोड़ रुपये का पूरा भुगतान कर दिया, लेकिन निर्माण कार्य वर्षों बाद भी अधूरा ही रहा।
पीठ ने कहा कि वर्ष 2021 में घर खरीदारों ने एचआरईआरए का रुख किया था, जिसने बिल्डर को मुआवजा देने का आदेश दिया। चूंकि बिल्डर ने इन आदेशों को चुनौती नहीं दी, इसलिए वे अंतिम और विधिक रूप से बाध्यकारी हो गए। इसके बावजूद न तो फ्लैटों का कब्जा दिया गया और न ही मुआवजा अदा किया गया। यहां तक कि आदेशों के क्रियान्वयन के लिए शुरू की गई कार्यवाही भी प्रभावी साबित नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत पारित अंतिम आदेशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया जा सके, तो इस कानून का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि यह मामला केवल कुछ घर खरीदारों का विवाद नहीं है, बल्कि रेरा व्यवस्था के क्रियान्वयन में मौजूद गंभीर संस्थागत कमियों को भी उजागर करता है।
पीठ ने बिल्डर के विरुद्ध पहले जारी किए गए दंडात्मक उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन में विफलता पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने उल्लेख किया कि जब वसूली की कार्यवाही सफल नहीं हुई तो एचआरईआरए ने जमानती वारंट जारी किए, लेकिन न्यायालय के बेलिफ को भी कंपनी के कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया। न्यायालय ने यह भी पूछा कि पहले जारी किए गए गैर-जमानती वारंटों का पालन क्यों नहीं कराया गया और कहा कि इससे प्रवर्तन तंत्र की गंभीर विफलता सामने आती है।
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा प्रशासन की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। पीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि जिला कलेक्टरों और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने या तो अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया अथवा बिल्डर के साथ मिलीभगत कर एचआरईआरए के आदेशों के पालन को सुनिश्चित नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि राज्य की प्रवर्तन व्यवस्था घर खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है।
घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए न्यायालय ने पार्श्वनाथ एक्सोटिका परियोजना से संबंधित किसी भी प्रकार के तृतीय पक्ष अधिकार सृजित करने पर रोक लगा दी है। साथ ही पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड, पार्श्वनाथ हेस्सा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड तथा उनके निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों के बैंक खातों को अगले आदेश तक फ्रीज रखने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने हरियाणा के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, सभी जिला कलेक्टरों, सभी पुलिस आयुक्तों और संबंधित बैंकों को आदेशों का तत्काल पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि राज्य प्रशासन को घर खरीदारों की शिकायतों के समाधान और रेरा के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी होना होगा।
सुनवाई के दौरान घर खरीदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रिया हिंगोरानी ने न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ताओं में से एक कैंसर से उबर चुके हैं और बिल्डर वर्तमान में चंडीगढ़ से अपना संचालन कर रहा है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि घर खरीदार वर्षों से विभिन्न मंचों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, जबकि बिल्डर लगातार एचआरईआरए के बाध्यकारी आदेशों की अनदेखी करता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि अप्रैल 2025 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार की उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत एचआरईआरए को वसूली प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार दिया गया था। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और उस मामले पर भी सुनवाई जारी है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी, जब न्यायालय यह देखेगा कि उसके आदेशों का पालन हुआ है या नहीं।
