अंतरराष्ट्रीय कानून की असली कसौटी समान न्याय है: सीजेआई सूर्यकांत

CJI Surya Kant Says Equality Is the Foundation of International Law Calls Access to Justice the True Measure

सेंट पीटर्सबर्ग: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून की मजबूती केवल संधियों और संस्थाओं से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि हर देश और प्रत्येक व्यक्ति को न्याय तक समान पहुंच प्राप्त है या नहीं। उन्होंने यह बात सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल लीगल फोरम में “समान न्याय, समान कानून” विषय पर अपने संबोधन के दौरान कही।

सीजेआई ने कहा कि “समानता ही कानून की वास्तविक नींव है।” उन्होंने बताया कि समानता का सिद्धांत मैग्ना कार्टा से भी पहले कौटिल्य के अर्थशास्त्र सहित विभिन्न सभ्यताओं की न्याय व्यवस्था में मौजूद था। उनके अनुसार कानून के समक्ष समानता किसी शासक की कृपा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था का मूल आधार है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित देशों की संप्रभु समानता का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून की वास्तविक परीक्षा तभी होगी जब प्रत्येक राष्ट्र और प्रत्येक नागरिक को न्याय प्राप्त करने का समान अवसर मिलेगा। सीजेआई ने यह भी कहा कि भारत की न्यायपालिका ने कानूनी सहायता, प्रक्रियात्मक सुधार और न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित कर संविधान के वादों को व्यवहार में उतारने का प्रयास किया है।

अपने संबोधन के अंत में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि समान न्याय और समान कानून केवल आदर्श नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक न्याय व्यवस्था की आधारशिला हैं और इन्हें मजबूत बनाए रखना प्रत्येक विधिवेत्ता की जिम्मेदारी है।