राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शंघाई सहयोग संगठन मानवाधिकार संस्थानों की पहली परामर्श बैठक में क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर दिया जोर

National Human Rights Commission

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने आज किर्गिज़ गणराज्य की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सदस्य देशों की मानवाधिकार संस्थाओं, राज्य निकायों और मानवाधिकार एवं स्वतंत्रताओं की सुरक्षा से जुड़े संगठनों की पहली परामर्श बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। बैठक में एनएचआरसी के महासचिव भारत लाल और संयुक्त सचिव समीर कुमार भी उपस्थित रहे। इस महत्वपूर्ण बैठक में किर्गिज़ गणराज्य के लोकपाल, SCO के उप महासचिव, रूस, चीन, ईरान, पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान और बेलारूस की राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं के प्रमुखों सहित अनेक विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने किर्गिज़ गणराज्य द्वारा SCO अध्यक्षता के दौरान इस पहली परामर्श बैठक के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं के बीच नियमित संवाद और सहयोग की पहल वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप है तथा इससे समकालीन सामाजिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में सार्थक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संस्थाएं राज्य और समाज के बीच विश्वास को मजबूत करने तथा सामाजिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय सहयोग राज्य की संप्रभुता के सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने, समानता और राष्ट्रीय हितों के पारस्परिक सम्मान जैसे सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने मसौदा प्रोटोकॉल में शामिल सूचना आदान-प्रदान, सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार, विशेषज्ञ सहयोग और मानवाधिकार संबंधी मुद्दों पर समन्वित दृष्टिकोण विकसित करने जैसे उद्देश्यों का स्वागत किया। उनके अनुसार, संस्थाओं के बीच नियमित संवाद से आपसी सीख और संस्थागत प्रभावशीलता में वृद्धि होगी।

उन्होंने एनएचआरसी के भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि संरचित प्रशिक्षण, संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता मानवाधिकार संस्थाओं की क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने SCO ढांचे के भीतर गहन सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और विश्वास व्यक्त किया कि यह परामर्श तंत्र भविष्य में मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए एक प्रभावी क्षेत्रीय मंच के रूप में विकसित होगा।

एक अन्य सत्र में न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने सुझाव दिया कि SCO सदस्य देशों की मानवाधिकार संस्थाएं नियमित सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और ऑनलाइन, ऑफलाइन तथा हाइब्रिड माध्यमों से संवाद आयोजित करें ताकि सर्वोत्तम अनुभवों का आदान-प्रदान हो सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 1993 में स्थापित एनएचआरसी ने पिछले 32 वर्षों में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े लगभग 23.7 लाख मामलों का निस्तारण किया है, जिससे प्राप्त संस्थागत अनुभव अन्य सदस्य देशों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पहली परामर्श बैठक पारस्परिक सम्मान, अनुभवों के आदान-प्रदान और मानव गरिमा के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित क्षेत्रीय मानवाधिकार सहयोग के लिए एक मजबूत और स्थायी ढांचे की नींव रखेगी।