आईटीएटी ने श्रीनाथजी एक्सट्रूज़न को बड़ी राहत दी, ₹1.33 करोड़ की स्टॉक जोड़तोड़ निरस्त

Income Tax Appellate Tribunal - ITAT

आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) ने श्रीनाथजी एक्सट्रूज़न के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कथित अतिरिक्त स्टॉक के आधार पर की गई ₹1.33 करोड़ की आय वृद्धि को रद्द कर दिया है। अधिकरण ने माना कि तलाशी के दौरान स्टॉक का आकलन वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया गया था और विभाग द्वारा अपनाई गई अनुमान आधारित गणना के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।

मामला 24 अक्टूबर 2018 को आयकर विभाग द्वारा किए गए तलाशी अभियान से जुड़ा है। जांच के दौरान विभाग ने व्हाट्सएप चैट और स्टॉक सत्यापन के आधार पर कंपनी पर उत्पादन छिपाने तथा अतिरिक्त स्टॉक रखने का आरोप लगाया था। इसके आधार पर आकलन अधिकारी ने बड़ी कर वृद्धि की थी।

हालांकि, आईटीएटी ने कहा कि केवल अनुमानित स्टॉक सत्यापन के आधार पर इतनी बड़ी कर वृद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता। अधिकरण ने पाया कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत मिलान विवरण (रिकन्सिलिएशन) का विभाग प्रभावी ढंग से खंडन नहीं कर सका। इसलिए ₹1.33 करोड़ की पूरी स्टॉक वृद्धि हटाने का निर्देश दिया गया।

साथ ही, अधिकरण ने व्हाट्सएप चैट और तलाशी के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर उत्पादन में कुछ हद तक कमी छिपाने के संकेत स्वीकार किए। लेकिन विभाग द्वारा एक माह के आंकड़ों को पूरे वित्तीय वर्ष पर लागू कर ₹25.57 करोड़ की कथित अघोषित बिक्री निकालने की कार्यवाही को अनुचित माना। अधिकरण ने केवल सीमित अवधि के लिए 10 प्रतिशत लाभ के आधार पर कर योग्य आय निर्धारित करने के आयुक्त (अपील) के निर्णय को बरकरार रखा।

फैसले में अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कई वर्षों से बकाया देनदारियां होने मात्र से आयकर अधिनियम की धारा 41(1) के तहत उन्हें समाप्त देनदारी मानकर कर नहीं लगाया जा सकता। इसी आधार पर ₹2.76 करोड़ की एक अन्य कर वृद्धि भी रद्द कर दी गई।

आईटीएटी ने यह भी दोहराया कि तलाशी मामलों में पूर्व वर्षों के आकलन में वृद्धि तभी की जा सकती है जब उन वर्षों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री तलाशी के दौरान बरामद हुई हो। केवल अनुमान या बाद की अवधि के आंकड़ों के आधार पर पुराने वर्षों में कर वृद्धि नहीं की जा सकती। यह निर्णय तलाशी एवं जब्ती मामलों में करदाताओं के अधिकारों और साक्ष्य आधारित कर निर्धारण के सिद्धांत को मजबूत करता है।