नई दिल्ली स्थित जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (दक्षिण-II) ने अवकाश सदस्यता योजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंट्री हॉलीडेज ट्रैवल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 91,000 रुपये ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है। आयोग ने माना कि कंपनी उपभोक्ता को वादा की गई सेवाएं उपलब्ध कराने में विफल रही और उसका आचरण सेवा में कमी (Deficiency in Service) की श्रेणी में आता है।
मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी भानु प्रताप सिंह द्वारा दायर उपभोक्ता शिकायत से संबंधित था। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि अक्टूबर 2022 में देहरादून के एक होटल में आयोजित सेमिनार के दौरान उन्हें कंपनी की छुट्टियों से संबंधित सदस्यता योजना लेने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद उन्होंने 91,000 रुपये का भुगतान कर सदस्यता ली। योजना के अनुसार उन्हें पांच वर्षों तक प्रत्येक वर्ष छह रात और सात दिन के ठहराव की सुविधा तथा अतिरिक्त बोनस सप्ताहों का लाभ मिलना था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि सदस्यता लेने के बाद जब उन्होंने ऊटी और तिरुवनंतपुरम सहित विभिन्न स्थानों पर होटल बुक कराने का प्रयास किया तो कंपनी द्वारा बार-बार उपलब्धता न होने का हवाला दिया गया। बाद में उन्होंने पाया कि कुछ होटल, जो कंपनी के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं बताए जा रहे थे, सामान्य ग्राहकों के लिए अन्य माध्यमों पर कम कीमत पर उपलब्ध थे। मजबूर होकर उन्हें अपने खर्च पर विभिन्न होटलों में ठहरने की व्यवस्था करनी पड़ी।
रिकॉर्ड के अनुसार फरवरी 2023 में शिकायतकर्ता ने अमृतसर में होटल बुकिंग का अनुरोध किया था। कंपनी ने कई वैकल्पिक होटल विकल्प भेजे, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी पसंद के अनुरूप बुकिंग सुनिश्चित नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा। कंपनी ने अपने जवाब में सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सदस्यता शुल्क समझौते के अनुसार वापसी योग्य नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई, जिसके चलते उसे एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने भुगतान रसीदों, समझौते, ईमेल संवाद, होटल बुकिंग दस्तावेजों और कानूनी नोटिस सहित विभिन्न दस्तावेज आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए। आयोग ने उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता ने वास्तव में 91,000 रुपये का भुगतान किया था और सदस्यता के तहत अपेक्षित सुविधाओं का लाभ प्राप्त नहीं कर सका।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता ने कंपनी द्वारा सुझाए गए होटल विकल्पों का चयन करने के बावजूद वांछित तिथियों पर बुकिंग प्राप्त नहीं की। आयोग ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि “शिकायतकर्ता कंपनी द्वारा सुझाए गए होटलों का चयन करने के बावजूद अमृतसर में निर्धारित तिथियों पर ठहरने की बुकिंग प्राप्त नहीं कर सका। इसलिए कंपनी सेवा में कमी की दोषी है।”
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार से जुड़े सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए आयोग ने माना कि किसी उपभोक्ता को भुगतान के बदले वादा की गई सेवा उपलब्ध न कराना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने कहा कि पर्यटन और अवकाश सदस्यता योजनाओं का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुनिश्चित सुविधाएं प्रदान करना है। यदि सेवा प्रदाता बार-बार उपलब्धता के अभाव का हवाला देकर सुविधाएं देने में असफल रहता है, तो उसे अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं माना जा सकता।
आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 91,000 रुपये की राशि भुगतान की तिथि से वसूली तक 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। इसके अतिरिक्त मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 2,000 रुपये का मुआवजा भी देने का आदेश दिया गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का पालन 60 दिनों के भीतर नहीं किए जाने पर देय राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो विभिन्न ट्रैवल, टाइम-शेयर और हॉलीडे सदस्यता योजनाओं में निवेश करते हैं। आदेश से यह संदेश जाता है कि यदि कंपनियां अनुबंध में किए गए वादों के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध नहीं कराती हैं, तो उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उन्हें राहत प्राप्त हो सकती है।
