सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की याचिका खारिज की, चुनाव याचिका की सुनवाई में देरी पर लगाई फटकार

Supreme Court of India

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 4 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका से जुड़ा है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान बघेल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा को चुनाव मामले की सुनवाई में देरी करने को लेकर फटकार लगाई।

पीठ ने टिप्पणी की, “ट्रायल को आगे बढ़ने दीजिए। आप जितना संभव हो सके, उतनी देरी कर रहे हैं। इस मामले में फैसला आएगा।”

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह मानकर गलती की कि चुनाव याचिका में पहले किसी प्रारंभिक मुद्दे पर निर्णय लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव याचिका समय-सीमा के भीतर दाखिल नहीं की गई थी, क्योंकि उसके साथ प्रस्तुत शपथपत्र में प्रक्रियात्मक खामी थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि पहले परिसीमा (Limitation) के प्रश्न पर निर्णय लिया जाए अथवा हाईकोर्ट की उस टिप्पणी को हटाया जाए, जिसमें किसी प्रारंभिक मुद्दे के अस्तित्व से इनकार किया गया था।

इस पर न्यायमूर्ति वी. मोहना ने कहा कि परिसीमा का प्रश्न तथ्य और कानून दोनों का मिश्रित प्रश्न है तथा इसे पहले ही लिखित जवाब में उठाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि बिना उचित आधार के प्रारंभिक मुद्दा तय नहीं किया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की कि किसी को बघेल को लिखित जवाब में संशोधन करने की सलाह देनी चाहिए थी। वहीं न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि चुनाव संबंधी मामलों का समयबद्ध निपटारा आवश्यक है। यदि अब परिसीमा के प्रश्न को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में स्वीकार किया जाता है, तो इसके बाद लिखित जवाब में संशोधन की मांग की जा सकती है, जिससे सुनवाई और लंबी हो जाएगी।

कपिल सिब्बल ने आश्वासन दिया कि उनकी ओर से आगे कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया जाएगा और इस संबंध में लिखित आश्वासन देने की पेशकश भी की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता के आग्रह पर याचिका पर जुर्माना लगाने से परहेज किया गया है।

क्या है भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव याचिका?

यह मामला भाजपा सांसद विजय बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर चुनाव याचिका से संबंधित है। विजय बघेल ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन विधानसभा सीट से भूपेश बघेल की जीत को चुनौती दी है।

चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया है कि भूपेश बघेल ने 16 नवंबर 2023 को पाटन विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा की थी, जबकि मतदान से पहले लागू 48 घंटे की प्रचार प्रतिबंध अवधि प्रभावी थी। इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 का उल्लंघन बताया गया है।

याचिकाकर्ता विजय बघेल ने इस आधार पर भूपेश बघेल का निर्वाचन निरस्त करने की मांग की है।

भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर आग्रह किया था कि मुख्य चुनाव याचिका के गुण-दोष पर सुनवाई से पहले यह तय किया जाए कि याचिका परिसीमा अवधि के भीतर दाखिल हुई है या नहीं।

हालांकि, 13 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस स्तर पर अलग से प्रारंभिक मुद्दे का निर्णय करने की अनुमति देना उचित नहीं है। इसी आदेश को भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

चुनाव मामलों में समयबद्ध सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट का जोर

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि चुनाव याचिकाओं का समयबद्ध निपटारा न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। चुनाव से संबंधित विवादों में अनावश्यक प्रक्रियात्मक आवेदन और बार-बार संशोधन की मांग से अंतिम निर्णय में देरी हो सकती है।