शेयर बाजार में कथित हेरफेर: ED की 6 शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी, एक लाख से अधिक निवेशकों को नुकसान

Supreme Court of India

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में कथित हेरफेर से जुड़े मामले में छह शहरों के 29 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। यह जांच R M Drip and Sprinklers Systems Limited और R and B Denims Limited के शेयरों में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। एजेंसी ने महाराष्ट्र के मुंबई और नासिक तथा गुजरात के अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में तलाशी ली।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और परिवर्तनीय वारंट जारी किए थे। एजेंसी इन लेनदेन और शेयरों को बढ़ावा देने के लिए अपनाए गए कथित तरीकों की जांच कर रही है।

व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए शेयर खरीदने का प्रचार

ED का आरोप है कि ‘Multibagger Stocks’ जैसे नामों वाले व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से प्रचार संदेश प्रसारित किए गए। इन संदेशों में खुदरा निवेशकों को संबंधित कंपनियों के शेयर खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस प्रचार गतिविधि के बाद दोनों कंपनियों के शेयर खरीदने वालों की संख्या लगभग 3,400 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गतिविधि के पीछे कौन-कौन से व्यक्ति और संस्थाएं शामिल थे तथा क्या शेयरों की कीमतों को प्रभावित करने के लिए समन्वित तरीके से प्रचार किया गया था।

व्हाट्सऐप ग्रुप हटने के बाद शेयरों में भारी गिरावट

ED ने बताया कि 25 फरवरी 2026 को संबंधित व्हाट्सऐप ग्रुप अचानक हटा दिए गए। इसके बाद दोनों कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गए और कुछ ही दिनों में उनके मूल्य में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इस घटनाक्रम से एक लाख से अधिक छोटे निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान होने की बात कही गई है। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि शेयरों में तेजी लाने के लिए प्रचार अभियान चलाया गया था या नहीं और उसके बाद हुई गिरावट का निवेशकों पर किस प्रकार प्रभाव पड़ा।

तलाशी में दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त

तलाशी अभियान के दौरान ED ने कथित रूप से आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, शेयर लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड और संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सामग्रियों का विश्लेषण कर जांच एजेंसी संदिग्ध लेनदेन, संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं तथा धन के प्रवाह के बारे में जानकारी जुटा सकती है।

यह मामला सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से शेयरों के प्रचार तथा खुदरा निवेशकों के निवेश निर्णयों को प्रभावित करने की आशंका से जुड़ा है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और उनकी पुष्टि लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी है।