भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण में निरंतर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष रक्षा वकीलों का अलग कैडर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पुलिस थाने में अभिरक्षा में लिए जाने से लेकर अंतिम आदेश और पुनर्वास तक कानूनी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
नई दिल्ली में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के दस वर्ष पूरे होने पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए CJI ने कहा कि किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि बच्चों का सुधार, पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण होना चाहिए। संस्थागत देखरेख या निरुद्ध रखना अंतिम विकल्प होना चाहिए।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा कि कई किशोर न्याय बोर्डों में NALSA की बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं योजना, 2024 के तहत कानूनी सहायता क्लीनिक अब भी स्थापित नहीं हैं। उन्होंने सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट तैयार करने और बच्चों की परिस्थितियों का समुचित आकलन सुनिश्चित करने के लिए परिवीक्षा अधिकारियों (Probation Officers) के रिक्त पदों को शीघ्र भरने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
