मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और बदहाल शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर राज्य सरकार एवं स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूल बिना किसी शिक्षक के संचालित हो रहे हैं। साथ ही लगभग 1.15 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जबकि कई स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक पदस्थ हैं। याचिका में जर्जर भवन, शौचालय, बिजली, पेयजल और कंप्यूटर जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति और तैनाती में गंभीर प्रशासनिक खामियों के कारण छात्रों के शिक्षा के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से शिक्षक भर्ती, पदस्थापना, प्रशिक्षण बजट के उपयोग और सीएजी रिपोर्ट में बताई गई कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है।
