नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की उस आपराधिक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दशकों पुराने सहकारी बैंक धोखाधड़ी मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और तीन वर्ष के कारावास की सजा को चुनौती दी थी। न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए दोषसिद्धि और सजा दोनों को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति मनोज जैन की एकलपीठ ने राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत द्वारा अप्रैल 2026 में दिए गए निर्णय को सही ठहराया। ट्रायल कोर्ट ने सहकारी कृषि विकास बैंक में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में राजेंद्र भारती को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
राजेंद्र भारती वर्तमान में मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं। हालांकि, दोषसिद्धि और तीन वर्ष की सजा के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। इस अधिनियम के अनुसार, दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पाने वाले जनप्रतिनिधि अयोग्य घोषित हो जाते हैं।
हाईकोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद ट्रायल कोर्ट का फैसला पूरी तरह प्रभावी बना हुआ है। इस निर्णय के साथ ही भारती की दोषसिद्धि और सजा पर हाईकोर्ट की मुहर लग गई है।
यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि निर्वाचन आयोग पहले ही दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर चुका है। राजेंद्र भारती की अयोग्यता के बाद यह सीट रिक्त हो गई थी।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने दतिया सीट से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों के अंतर से पराजित किया था। इस जीत के साथ उन्होंने दतिया विधानसभा क्षेत्र में डॉ. मिश्रा के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक वर्चस्व को समाप्त कर दिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद दतिया विधानसभा उपचुनाव का रास्ता और अधिक स्पष्ट हो गया है, जबकि राजेंद्र भारती के लिए कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौतियां बढ़ गई हैं।
