सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण (सीईएसटीएटी) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में धनबाद की कंपनी लिब्रा बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में निर्णय देते हुए 1.03 करोड़ रुपये से अधिक के सेनवेट क्रेडिट की अस्वीकृति, उस पर लगाए गए ब्याज और दंड को रद्द कर दिया है।
मामला वर्ष 2010 में खरीदे गए 25 वोल्वो टिपर्स पर लिए गए सेनवेट क्रेडिट से जुड़ा था। विभाग का कहना था कि टिपर्स को 22 जून 2010 से ही “पूंजीगत वस्तु” की श्रेणी में शामिल किया गया था, जबकि कंपनी ने इन्हें उससे पहले प्राप्त कर लिया था। इसी आधार पर विभाग ने क्रेडिट को अवैध बताते हुए उसकी वसूली की कार्रवाई शुरू की थी।
कंपनी ने अधिकरण के समक्ष दलील दी कि टिपर्स का वास्तविक उपयोग वाहन पंजीकरण के बाद ही संभव था और अधिकांश वाहनों का पंजीकरण 22 जून 2010 के बाद हुआ। साथ ही कंपनी ने यह भी बताया कि विवादित क्रेडिट का उपयोग मई 2011 से शुरू किया गया था और इसकी पूरी जानकारी वैधानिक रिटर्न में दी गई थी।
अधिकरण ने माना कि वाहन पंजीकरण के बिना टिपर्स का उपयोग संभव नहीं था और जब उनका उपयोग उस तारीख के बाद हुआ, जब वे सेनवेट क्रेडिट के लिए पात्र हो चुके थे, तो केवल तकनीकी आधार पर क्रेडिट से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधिकरण ने कहा कि “सेनवेट क्रेडिट करदाताओं को दिया गया एक महत्वपूर्ण लाभ है, जिसे केवल प्रक्रियागत या तकनीकी कारणों से अस्वीकार नहीं किया जा सकता।”
सीईएसटीएटी ने यह भी पाया कि कंपनी ने सभी विवरण सेवा कर रिटर्न में घोषित किए थे और विभाग ने वर्ष 2012 के ऑडिट के दौरान इस मुद्दे की जांच भी की थी। ऐसे में तथ्यों को छिपाने या गलत जानकारी देने का आरोप टिक नहीं सकता। इसी आधार पर अधिकरण ने विस्तारित समय सीमा लागू करने को भी अवैध ठहराया।
अंततः अधिकरण ने 1,03,88,050 रुपये के सेनवेट क्रेडिट की वसूली, उस पर ब्याज और वित्त अधिनियम, 1994 की धारा 78 के तहत लगाए गए दंड को रद्द करते हुए कंपनी की अपील स्वीकार कर ली। यह फैसला खनन, परिवहन और अवसंरचना क्षेत्र की उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो पूंजीगत उपकरणों पर उपलब्ध कर लाभ से जुड़े विवादों का सामना कर रही हैं।
