बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शराब की बोतलों में हुई टूट-फूट के मामले में डिस्टिलरी कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए कलेक्टरों द्वारा लगाए गए जुर्माने और वसूली के आदेश रद्द कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल गोदाम में शराब की बोतलें टूटने से निर्माता पर जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। निर्माता को जिम्मेदार ठहराने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि नुकसान खराब या अनुचित पैकिंग अथवा मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट के कारण हुआ था।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 6 अक्टूबर 2026 को एक साथ दायर कई रिट याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि संबंधित अनुबंध की शर्तों के अनुसार स्टॉक का जोखिम और स्वामित्व खरीदार के पास था। विक्रेता की जिम्मेदारी केवल उन मामलों में बनती थी, जहां टूट-फूट खराब पैकिंग या निर्माण दोष के कारण हुई हो।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शो-कॉज नोटिस का जवाब नहीं देना जिम्मेदारी स्वीकार करना नहीं है। प्राधिकारी को स्वयं यह निर्धारित करना होगा कि नुकसान किस कारण हुआ और क्या वह अनुबंध के तहत निर्माता की जिम्मेदारी में आता है।
मामले में Excise अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ Foreign Liquor Rules, 1996 के Rule 17(2) के तहत कार्रवाई की थी। हाईकोर्ट ने माना कि वैधानिक शक्ति होने के बावजूद अधिकारियों को अनुबंध की संबंधित शर्तों और नुकसान के वास्तविक कारण की जांच किए बिना वित्तीय दायित्व नहीं लगाया जा सकता।
कोर्ट ने सभी संबंधित रिट याचिकाएं स्वीकार करते हुए कलेक्टरों के वसूली एवं जुर्माना आदेश रद्द कर दिए और कंपनियों को लगाए गए दायित्व से मुक्त कर दिया। हालांकि, भविष्य में किसी कमी या नुकसान के मामले में कानून और अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता सक्षम प्राधिकारी को दी गई है।
