बेमेतरा में नेशनल लोक अदालत: 3.02 करोड़ रुपये की समझौता राशि वसूली, 6 परिवारों में हुआ सुलह

The Rajpatra Law Judgment

बेमेतरा। जिला न्यायालय बेमेतरा में 12 सितंबर 2026 को वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती सरोज नंद दास ने दीप प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत का शुभारंभ किया। उन्होंने पक्षकारों से आपसी सहमति और सुलह-समझौते के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का निराकरण कराने की अपील की।

लोक अदालत में कुल 14,246 प्री-लिटिगेशन एवं लंबित प्रकरण निराकरण के लिए रखे गए। इनमें विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों के साथ न्यायालयीन प्रकरण शामिल थे। न्यायालय में लंबित 41 आपराधिक, 12 सिविल, 19 पारिवारिक, एनआई एक्ट की धारा 138 के 6, मोटर दुर्घटना दावा के 12 तथा 2,788 अन्य प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन मामलों में 2,82,19,127 रुपये का अवार्ड पारित हुआ, जबकि जिले में कुल 3,02,10,140 रुपये की समझौता राशि वसूली गई।

पक्षकारों की सुविधा के लिए विधिक सहायता डेस्क, स्वास्थ्य डेस्क और चिकित्सकीय वैन के साथ बैंक, विद्युत विभाग, नगर पालिका एवं बीएसएनएल के स्टॉल लगाए गए। बैंक के 23 और विद्युत विभाग के 51 प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निराकरण हुआ। लोक अदालत के लिए जिला न्यायालय में 9 और साजा तहसील न्यायालय में 1, कुल 10 खण्डपीठों का गठन किया गया था।

लोक अदालत के दौरान विधिक जागरूकता के लिए न्याय वृक्ष, द्वार तोरण, पाम्पलेट और लघु फिल्मों का सहारा लिया गया। घरेलू हिंसा, लैंगिक अपराध, साइबर क्राइम, मोटर दुर्घटना और अन्य कानूनी विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया। समझौता करने वाले पक्षकारों को पौधे भी वितरित किए गए।

धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के एक मामले में मीडिएशन के बाद दोनों पक्षों के बीच 1.20 लाख रुपये छह किश्तों में भुगतान पर सहमति बनी और प्रकरण का निराकरण किया गया। वहीं आपराधिक एवं सिविल मामलों में भी आपसी राजीनामे के आधार पर विवाद समाप्त किए गए।

कुटुम्ब न्यायालय में लोक अदालत का विशेष प्रभाव देखने को मिला। कुल 19 प्रकरणों का निपटारा करते हुए न्यायाधीश श्री मधुसूदन चन्द्राकर के प्रयासों से 6 दंपत्तियों के बीच सुलह कराई गई और उन्हें साथ घर भेजा गया। कई मामलों में काउंसलिंग के माध्यम से वर्षों से चले आ रहे पारिवारिक विवादों को समाप्त कराया गया।

नेशनल लोक अदालत ने आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से विवादों के समाधान का संदेश देते हुए पक्षकारों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।